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🌸🌸🌸1 मई 1978 :: आगरा कांड 🌸🌸🌸
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आगरा जाटवों की राजधानी है। यह एतिहासिक घटना 1मई 1978 को इसी जाटवों की राजधानी में घटित हुई थी। 1957 से जाटव समाज बाबा साहब की जयंती मनाते हैं। 14 अप्रैल को को आगरा के मुख्य बाजारों से होकर बाबा साहब की शोभायात्रा हाथी पर निकाली जाती है।रावत पाड़ा, बेलन गंज पीपल मंडी के सवर्ण शोभायात्रा की भव्यता एवं हाथी पर सवार बाबा साहब के डोले से जलते हैं मनकामेश्वर मंदिर के सामने से गुजरने के कारण बैमनस्यता रखते हैं।
यह घटना 14 अप्रैल 1978 की है जब शोभायात्रा का हाथी रात्रि के 8 बजे मनकामेश्वर मंदिर के सामने से गुजर रहा था तब छतों से बाबा साहेब के ढोले पर पथराव कर दिया प्रतिमा छतिग्रस्त हो गई। पत्थरों से हम लोगो को भी चोटें आई। यकायक घटना से शोभायात्रा में भगदड़ मच गई।उस समय सुरक्षा के नाम पर हाथी के पीछे पुलिस की एक गाड़ी चलती थी जिसमें एक दरोगा 4 पुलिस वाले होते थे जब हमने इस घटना की सूचना पुलिस को दी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की वल्कि शोभायात्रा को जल्दी से आगे बढ़ाने को कहा। इस बात से लोगों में रोष व्याप्त हो गया। भीड़ ने दुकानों के टिनशेड तिरपाल आदि उखाड़ फेंके और मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए आगे बढ़ गये। पीपल मंडी में महाराजा होटल की छत से एक बड़ी जलती हुई लकड़ी हाथी के ऊपर फेंकी। इत्तफाक से जलती हुई लकड़ी हाथी के पीछे गिरी। इतनी बड़ी घटना पर पुलिस प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। रोष पूर्ण स्तिथि में जैसे तैसे शोभायात्रा पूरी की गई।
15 अप्रैल को समाचार पत्रों में इस बड़ी घटना की कोई कवरेज नहीं थी। उस समय अमर उजाला, सैनिक और विकासशील भारत समाचार पत्र थे। 15 अप्रैल को रावत पाड़ा के दुकानदारों ने इस बात को लेकर प्रदर्शन किया कि अम्बेडकर शोभायात्रा के लोगों ने हमारी दुकानों की तोड़ फोड़ की है। इसके विरोध में प्रदर्शन कर मांग की कि रावत पाड़ा से शोभायात्रा नहीं निकलने देंगे।
इस क्रिया की प्रतिक्रिया 16 अप्रैल को हुई। जाटव समाज के नेताओं ने बुद्ध विहार चक्की पाट आगरा पर बैठक बुलाई जिसमें पूर्व विधायक खेमचंद सौगत, पूर्व विधायक मा. मान सिंह, पूर्व विधायक बनवारी लाल विप्रा भंते कोडिन्य, भंते ज्ञान प्रभाकर, रामसिंह भारतीय, सावलदास कैन, करतार सिंह भारतीय, दयाकिशन जरारी भरत सिंह पिपल, शिवचरन लाल मानव आदि मौजूद थे। बैठक में रावत पाड़ा के दुकानदारों की आलोचना की और 22 अप्रेल को अम्बेडकर अनुयायियों का एक बड़ा जुलूस निकालने की घोषणा की। मैने अपने पैसों से शिवचरन लाल मानव आदि मित्रों के सहयोग से पुरे शहर के जाटव मोहल्लौ में तांगे पर रेडियो बांधकर 5 दिन लगातार ऐनाउंसमेंट किया। इस का असर यह हुआ कि 22 अप्रैल को कन्या पाठशाला काजी पाड़ा जहाँ से जुलूस शुरू होना था भारी संख्या में लोग पहुंच गए। जुलूस शुरू हुआ। हजारों की भीड़ उत्साही लोग लोग नारे लगा रहे थे लाठी गोली खाएंगे रावत पाड़ा जाऐंगे।
आगे पीछे भारी संख्या में पुलिस बल डी एम विवेक नरायन चन्ना एस एस पी दोनों ही जुलूस के आगे चल रहे थे। जैसे ही जुलूस जौहरी बाजार से रावत पाड़ा की तरफ मुड़ा पुलिस ने जुलूस को वही रोक दिया। जुलूस की अगुवाई कर रहे नेताओं और अधिकारियों से कुछ गुफ्तगू हुई उसके बाद नेताओं ने जनता से कहा कि अब जुलूस रावतपाड़े न जाकर किनारी बाजार होकर जाएगा परन्तु अम्बेडकर अनुयायियों ने साफ मना कर दिया और नारे लगाने लगे लाठी गोली खाएंगे रावत पाड़ा जाएंगे। कुछ नेता सड़क पर लेट गये रावत पाड़ा जाना है तो हमारे ऊपर होकर जाना होगा। तभी एक जूता रावत पाड़े की तरफ से अधिकारियों की ओर उछाल दिया वह अधिकारियों के सामने गिरा। जूते के गिरते ही जुलूस पर लाठीचार्ज के आदेश दे दिए गए। जुलूस पर लाठी बरसने लगी आंसू गैस के गोले छोड़े गए। जुलूस तितर बितर हो गया। हम सभी के चोटें आई।
23 अप्रैल को अम्बेडकर अनुयायियों की फिर एक बैठक बुद्ध विहार चक्की पाट आगरा पर हुई। बैठक में एक राय से फैसला हुआ कि 24 अप्रैल से जेल भरो आंदोलन चलाया जाए। पहले जत्थे में सभी नेता जेल जाऐगे जिला प्रशासन को मेमोरेंडम दे दिया गया। 24 अप्रैल को सभी नेता जेल चले गए। जेल भरो आंदोलन की बागडोर सभी मोहल्लौ के चौधरी पंचौ को सौप दी गई। अब तो हर रोज एक जत्था डेढ़ दो सौ लोगों का जेल जाने लगा। यह सिलसिला 30 अप्रैल तक चला। 1मई को चक्की पाट का जत्था जाना था मैं तैयारियां करने में लगा हुआ था। एक जत्था कलक्ट्री पहुंच गया था। जत्था वापस किया जा रहा था वजह जेल में जगह नहीं है इस बात को लेकर सी. ओ. यादव और प्रताप सिंह महरमपुरिया में झड़प हो गई प्रताप सिंह ने सी ओ यादव को चांटा मार दिया। इस घटना के बाद सत्याग्रहियो पर लाठीचार्ज हो गया कलक्ट्री से जो लोग चक्की पाट काजी पाड़ा टीलानंद राम वापस आए उनके पीछे पुलिस उन्हें मारती चली आ रही थी। मोहल्ले में आकर सत्याग्रहियो ने पुलिस पर पथराव कर दिया।
पुलिस को भागना पड़ा। जगह जगह-जगह मोर्चे लग गये चारों तरफ जाटव मोहल्लौ पर पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से हमला बोल दिया। चारों ओर त्राहि-त्राहि मची हुई थी। मोहल्लौ के लोगों ने अपने बचाव में ईट पत्थर फेंकना शुरू कर दिया कुछ नौजवानों ने सैलूसन को बोतलों और कुल्लड़ में भर के उनमें आग लगा कर पुलिस पर फैकने लगे। इससे पुलिस पीछे हटने लगी पुलिस हमारी ईंटों और चिपक बम्ब का मुकाबला नहीं कर पा रही थी। यह लड़ाई पूरे जाटव मोहल्लौ में फैल चुकी थी चक्की पाट बाजार में घमासान लड़ाई चल रही थी। तलैया काजी पाड़ा में माल ढोने की घोड़ा गाड़ी जिसे खड़खड़िया कहते हैं खड़ी हुई थी चक्की पाट और तलैया के 50 - 60 नौजवान लड़के मैं स्वयं मेरा छोटा भाई अशोक बाबू दया चंद मोहर सिंह रतन ओम प्रकाश सूरज नरायन सिंह छीतर इंदर सीता राम आदि मोर्चा संभाले हुए थे।अशोक बाबू ने खड़खड़िया में ईट पत्थर भरकर सड़क पर खींच लाए पुलिस पर पथराव कर दिया। इस हमले से पुलिस भागने लगी। उस समय तेज धूप थी दोपहर के 2 बजे थे। हमारा मोर्चा रतन बिल्डिंग के पास था। पुलिस हम्माम गेट पर मोर्चा संभाले हुए थी उस समय डी एम, एस एस पी घोड़े पर बैठ कर पुलिस को निर्देश दे रहे थे। अशोक बाबू के पथराव से पुलिस के होस उड़ रहे थे। इंस्पेक्टर रकाब गंज हरिसिंह लाम के हाथ में मस्कट बंदूक थी अधिकारियों ने गोली चलाने के आदेश दे दिए थे हरिसिंह लाम ने अशोक बाबू को निशाना बनाकर गोली मारी जो सीने में लगी । मैं पास में ही खड़ा था पुलिस वाले लगातार गोलियां चला रहे थे अशोक बाबू के 5 गोलियां लगी तो वह गिरने लगे मैंने उन्हें अपनी गोदी में ले लिया हम दोनों भाई सड़क पर गिर पड़े। एक गोली दयाचंद के सिर में लगी वे भी गिर पड़े। हमारे गिरने से लोग पीछे हटने लगे पुलिस आगे बढने लगी पी ए सी के जवानों ने हमारे ऊपर लाठियों वरसानी शुरू कर दी जिससे मैं बेहोश हो गया। भारी तादाद में पुलिस ने गोलियां चलाई। तलैया में पुलिस की गोली रामश्री (राम बाबू वर्मा की मां) के लगी उनकी मौत हो गई। चक्की पाट के नत्थी लाल और नेकराम की पुलिस ने गोली मारकर हत्या कर दी।
जो लोग बेहोश और जखमी हो गए थे उन्हें और हम दोनों भाईयों को पी ए सी की गाड़ी में डाल कर रकाब गंज थाने ले गये। वहां सबको जमीन पर पटक दिया। शाम को 7 बजे के लगभग हम सभी को जिला अस्पताल ले गए। मैं बेहोश था जब मुझे होश आया तो मैं एस एन हास्पिटल में था मेरे शरीर पर सैकड़ों लाठी के निशान थे पूरा शरीर नीला पड़ रहा था। अशोक बाबू शहीद हो चुके थे। दूसरे दिन पता चला कि ज्ञास पुरा के गनेश राजेश पुलिस की गोली से शहीद हो गए हैं। इस प्रकार ग्यारह लोग आगरा काण्ड में शहीद हो गए हैं। आगरे की हालत ज्यादा बिगड़ने पर दूसरे दिन मिलिट्री ने कमान संभाली। एक महीने कर्फ्यू लगा। हालात काबू में होने पर देश भर के नेता हमदर्द लोग हमारे दुख दर्द में शामिल होने के लिए आये। हमारे घर पू. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आई और हमारी माँ से मिल कर सांत्वना देकर गई।
इस आगरा काण्ड की गूंज विदेशों तक पहुंची। वी वी सी लंदन ने इस घटना की घोर निंदा की। इस घटना से आगरा मंडल के आसपास के जिलों में जाटवों की धाक और सम्मान बहुत बढ गया था।
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